” करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान “
खजुरी बाजार
ज्ञान को महामंडित करने वाला यह दोहा करीब एक सदी पुरानी स्वरूप ब्रदर्स कि दुकान कि अभ्यास पुस्तिकाओ पर अंकित रहता था | आपने जब भी खजुरी बाजार का नाम सुनते है तो ऐसा लगता है जैसे इस बाजार का नाम किसी खजूर के पेड़ के कारण पड़ा होगा | परन्तु इस बाज़ार का नामकरण होलकर राज्य के प्रतिष्ठित जागीरदार घराने के कारण पड़ा | कहा जाता है कि राव राजा जसवंत सिंह नमक एक सज्जन इस मोहल्ले में रहते थे जिनके नाम पर इस सड़क का नाम खजुरी बाज़ार रखा गया होगा |यशवंत राव होलकर प्रथम से लेकर यशवंत राव होलकर द्वितीय तक के लम्बे अंतराल में जिन प्रतिष्ठित घरानों का होलकर राज्य कि सरंचना और कूटनीति व्यूह रचना में महत्वपूर्ण योगदान रहा उनमे से कुछ इसी सड़क पर अपनी अपनी हवेलियों में रहा करते थे | मध्यभारत के तत्कालीन डेवलेपमेंट कमिश्नर स्व. सुरेन्द्र नाथ दुबे के पितामह राज्य के प्रधान सेनापति थे | यह काल था तुकोजीराव द्वितीय का | इन्ही के वंश के मेजर राम प्रसाद और जनरल दुर्गा प्रसाद राज्य के विभिन्न सैनिक पदों पर आसीन रहे | महाराजा तुकोजीराव तृतीय के बाल सखा रहे राय बहादुर डा. महादेव पृथ्वीनाथ महाराजा के साथ मेयो राजकुमार कालेज अजमेर में कम्पेनियन के रूप में गये थे | उसके बाद आपने १९०८ में लन्दन से एम्.आर.पी.वी.एस. ( मेंबर ऑफ़ रोयल कालेज ऑफ़ वेटेनरी सर्जन) कि उपाधि अर्जित कि | सन १९१० में आपने सेंडहर्स्ट मिलिट्री एकेडेमी से केवली में विशेष योग्यता हासिल की | आपको महाराजा ने होलकर केवली ( घुड़सवार सेना ) का इंचार्ज बना दिया | इनकी हवेली भी इसी सड़क के आगे हुआ करती थी |
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